2300 किमी का सफर: सतना से किर्गिस्तान पहुँचा मध्य प्रदेश का गिद्ध, GPS ट्रैकिंग ने बताया सफर का राज़ l

---Advertisement---

2300 किमी का सफर: सतना से किर्गिस्तान पहुँचा मध्य प्रदेश का गिद्ध, GPS ट्रैकिंग ने बताया सफर का राज़ l

 

*सतना/भोपाल:* मध्य प्रदेश के सतना जिले से उड़ान भरने वाला एक गिद्ध (हिमालयन ग्रिफॉन वल्चर) इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गिद्ध ने अपने पंखों में 2300 किलोमीटर का सफर समेटते हुए सतना से किर्गिस्तान तक की यात्रा की है। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से इसके सफर पर नजर रखी गई, जिसने वन्यजीवों की प्रवासी यात्राओं के बारे में नई जानकारियाँ दी हैं।

 

खेत में मिला था घायल गिद्ध, वन विभाग ने बचाया

जनवरी 2024 में सतना जिले के एक गाँव के खेत में स्थानीय लोगों को एक घायल गिद्ध मिला। पंखों में चोट और कमजोरी की वजह से वह उड़ नहीं पा रहा था। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद वन अधिकारियों ने उसे बचाकर इलाज के लिए भोपाल के *वन विहार नेशनल पार्क* स्थित *वल्चर कंजर्वेशन सेंटर* में भेजा। यह केंद्र गिद्धों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए प्रसिद्ध है।

 

### **दो महीने का इलाज और प्रशिक्षण**

भोपाल में विशेषज्ञों ने गिद्ध की चोटों का इलाज किया और उसे स्वस्थ होने में दो महीने लगे। इस दौरान उसे उड़ान के लिए तैयार करने हेतु प्रशिक्षण भी दिया गया। 29 मार्च 2024 को इसे *हलाली डैम* (विदिशा) के पास खुले आकाश में छोड़ा गया। गिद्ध के पैर में एक जीपीएस ट्रैकर लगाया गया था, ताकि उसकी गतिविधियों और प्रवासी रास्तों का अध्ययन किया जा सके।

 

### **विदिशा से राजस्थान, फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान होते हुए किर्गिस्तान पहुँचा**

जीपीएस डेटा के अनुसार, गिद्ध ने विदिशा की पहाड़ियों से उड़ान भरी और राजस्थान की ओर बढ़ा। वहाँ से यह पाकिस्तान के रेगिस्तानी इलाकों से होता हुआ अफगानिस्तान के *मज़ार-ए-शरीफ* तक पहुँचा। इसके बाद यह मध्य एशिया की ओर बढ़ा और अंततः *किर्गिस्तान* पहुँच गया। इस पूरी यात्रा में उसने लगभग 2300 किलोमीटर की दूरी तय की।

 

### **वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण डेटा**

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्धों की लंबी दूरी की उड़ानों के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है। इस गिद्ध की ट्रैकिंग से पता चला कि ये पक्षी भारत से मध्य एशिया तक की लंबी यात्रा कर सकते हैं। यह डेटा गिद्ध संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट आई है।

 

### **गिद्धों के संरक्षण की जरूरत**

भारत में एक समय गिद्धों की संख्या लाखों में थी, लेकिन पशुओं को दी जाने वाली दर्दनिवारक दवा *डाइक्लोफेनाक* के कारण इनकी आबादी 99% तक कम हो गई। अब सरकार और संरक्षण संस्थाएँ इनके बचाव के लिए काम कर रही हैं। मध्य प्रदेश का वल्चर कंजर्वेशन सेंटर ऐसा ही एक प्रयास है, जहाँ घायल गिद्धों को ठीक करके वापस प्रकृति में छोड़ा जाता है।

 

### **क्या गिद्ध वापस लौटेगा?**

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिद्ध अगले कुछ महीनों में वापस भारत आ सकता है, क्योंकि गिद्ध प्रवासी पक्षी होते हैं और अक्सर अपने पुराने रास्तों पर लौटते हैं। जीपीएस ट्रैकिंग से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

 

### **निष्कर्ष**

यह घटना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सुखद समाचार है। गिद्धों की घटती संख्या को देखते हुए ऐसे प्रयास और बढ़ाने की जरूरत है। इस गिद्ध की 2300 किमी की यात्रा न केवल वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी है, बल्कि यह जागरूकता फैलाने में भी मददगार साबित हो रही है कि गिद्ध हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment