मारवाड़ी घोड़े को पहचान दिलाने वाले स्वर्गीय राव जोधसिंह की 21वीं पुण्यतिथि आज

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मारवाड़ी घोड़ों को देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाने वाले स्वर्गीय राव जोधसिंह की 21वीं पुण्यतिथि के अवसर पर अश्वपालक एवं खेल संघ के सदस्य आज श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

स्वर्गीय राव जोधसिंह, जो प्रसिद्ध मारवाड़ी घोड़ों अलीबाबा, अप्सरा, तामज़ाम, तेजरूप, रंगजड़ाव, अबलक, सिद्धराज, सम्राट, और आलमगीर के ब्रीडर एवं प्रशिक्षक थे, का निधन 31 मई 2003 को एक सड़क दुर्घटना में हुआ था। राजस्थान घुड़सवारी संघ के उपाध्यक्ष और हॉर्सइंडिया के निदेशक डॉ. राव अजीत सिंह ने बताया कि उनके स्वर्गीय पिता ने कई पीढ़ियों से चले आ रहे परंपरागत अश्वपालन को एक नई दिशा दी और इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

स्वर्गीय राव जोधसिंह के इंटरव्यू और आलेख कई प्रतिष्ठित विदेशी पत्रिकाओं जैसे हॉर्स एंड हाउंड, व्हिस्परर, इक्विटाना और भारतीय पत्रिकाओं जैसे इंडिया टुडे, आउटलुक, सुजस, और ग्रहशोभा में प्रकाशित हुए हैं। वर्तमान में सोनाणा खेतलाजी स्थित अस्तबल पर लगभग 250 से 300 विदेशी पर्यटक और 3000 से 4000 देशी पर्यटक प्रतिवर्ष इस अश्व संस्कृति को देखने के लिए आते हैं।

डॉ. राव अजीत सिंह ने कहा कि उनके पिता द्वारा शुरू किए गए इस महत्वपूर्ण कार्य को वे और उनका परिवार आगे बढ़ा रहे हैं, और यह उनकी एक महान विरासत है।

 

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