दुर्गम इलाका, कोई सुरक्षा नहीं: आतंकियों ने बैसरन को ही निशाना क्यों बनाया?

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कश्मीर की वादियों में बसे एक शांत पर्यटन स्थल — बैसरन — को इस सप्ताह एक घातक आतंकी हमले ने हिला कर रख दिया। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा किए गए इस हमले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है — आख़िर बैसरन ही क्यों?

भूगोल में छुपा है हमला करने का कारण

बैसरन, जिसे “मिनी स्विट्ज़रलैंड” कहा जाता है, पहलगाम से लगभग 5.5 किमी की दुर्गम चढ़ाई पर स्थित है। यह इलाका चारों तरफ से गहरी घाटियों और घने जंगलों से घिरा है। यहाँ तक पहुंचने के लिए या तो ट्रेकिंग करनी होती है, या फिर घोड़े अथवा ATV का सहारा लेना पड़ता है। यही दुर्गमता इसे आतंकियों के लिए एक आदर्श निशाना बनाती है — कम सुरक्षा, देर से पहुंचने वाली प्रतिक्रिया और भागने के लिए जंगल।

कोई सुरक्षा नहीं, कोई रोकटोक नहीं

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे 5.5 किमी के रास्ते में एक भी पुलिस पिकेट नहीं था। जबकि हर दिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसी स्थिति में आतंकी न केवल हमला करने में सफल हुए, बल्कि हमले के बाद आसानी से भागने में भी कामयाब रहे।

सोची-समझी रणनीति और स्थानीय सहयोग

सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने हमले से पहले अपने ओवरग्राउंड वर्कर्स के जरिए इलाके की रेकी की थी। घने जंगलों में ठिकाना बना चुके ये आतंकी हमले के समय बॉडी कैमरा पहने हुए थे, जिससे यह साफ होता है कि वे अपने अभियान को रिकॉर्ड कर प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल करने की योजना में थे।

पर्यटन की आड़ में आतंक का रास्ता

1990 के दशक से अब तक शायद ही कभी कश्मीर में पर्यटकों को सीधे निशाना बनाया गया हो। लेकिन अब लगता है कि आतंकवादियों की रणनीति बदल रही है। पर्यटन केंद्रों को टारगेट करना एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बनता जा रहा है — लोगों के मन में डर बिठाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना।

बैसरन पर हुआ यह हमला एक चेतावनी है — सिर्फ बॉर्डर ही नहीं, पर्यटन स्थलों की भी सुरक्षा जरूरी है। क्या प्रशासन अब इस चुनौती के प्रति जागरूक होगा? या फिर पहलगाम की वादियों में खतरा अब नई पहचान के साथ लौटेगा?

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